Friday, September 21, 2007
bholu
भोलू तेली गाँव में, करै तेल की सेलगली-गली फेरी करै, 'तेल लेऊ जी तेल''तेल लेऊ जी तेल', कड़कड़ी ऐसी बोलीबिजुरी तड़कै अथवा छूट रही हो गोलीकहँ काका कवि कछुक दिना सन्नाटौ छायौएक साल तक तेली नहीं गाँव में आयोमिल्यौ अचानक एक दिन, मरियल बा की चालकाया ढीली पिलपिली, पिचके दोऊ गालपिचके दोऊ गाल, गैल में धक्का खावै'तेल लेऊ जी तेल', बकरिया सौ मिमियावैपूछी हमने जे कहा हाल है गयौ तेरौभोलू बोलो, काका ब्याह है गयौ मेरौ
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